आचार्य चाणक्य का नाम तो आप सबने सुना ही होगा। वह बचपन से ही प्रतिभावान , जिज्ञासु और अध्ययनशील थे। उन्होंने संपूर्ण वेदों और अर्थशास्त्र का अध्ययन किया। आचार्य चाणक्य वेद और अर्थशास्त्र के प्रकांड पंडित थे। वे एक महान विद्वान थे। आचार्य चाणक्य ने चंद्रगुप्त मौर्य को अपना शिष्य बनाया उसे युद्ध और राजनीति की शिक्षा दी तथा समय-समय पर उसका मार्गदर्शन किया जिस कारण चंद्रगुप्त मौर्य एक महान राजा बन गया था। कोई भी व्यक्ति आचार्य चाणक्य के बताए गए रास्तों को अपनाकर अपने जीवन में सफल हो सकता है। आचार्य चाणक्य ने वेदों तथा राजनीति के ज्ञान को लोगों तक पहुंचाया जिसे हम चाणक्य नीति के नाम से भी जानते है। इस चाणक्य नीति का प्रयोग करके कोई भी व्यक्ति अपने जीवन के दुखों तथा समस्याओं से मुक्ति प्राप्त कर सकता है।

आपदार्थे धनं रक्षेच्छ्रीमतां कुत अापदः ।
कदाचिच्चलते लक्ष्मीःसंचितोऽपिविनश्यति ।।
अर्थ- भविष्य में आने वाली मुसीबतो के लिए धन एकत्रित करें। ऐसा ना सोचें की धनवान व्यक्ति को मुसीबत कैसी? जब धन साथ छोड़ता है तो संगठित धन भी तेजी से घटने लगता है।
व्याख्या-
धन कब आपके पास से चला जाए इस बात का कोई भरोसा नही होता इसीलिए हमे अपने धन की रक्षा करनी चाहिए। धन चले जाने पर कोई सँगा-सम्बन्धी भी आपका साथ नही देता।




