
लेखांकन(ACCOUNTING)-लेखांकन दो अंकों के योग से बना है लेख व अंकन , लेख का मतलब लिखने से होता है व अंकन का मतलब अंको से होता है। किसी घटना को अंको में लिखे जाने को लेखांकन कहते है।जब हम व्यापार में किसी माल का क्रय या विक्रय करते है या लेन-देन करते है तो उसे खातों में लिखे जाने को ही लेखांकन कहते है।आसान शब्दों में कहें तो व्यापारी अपने व्यापार का सारा लेन-देन , आय-व्यय , संपत्ति-दायित्व(ASSETS-LIABILITIES) तथा व्यापार से संबंधित अन्य सभी बातें जिनका ब्यौरा रखते है उसे लेखांकन कहते है।
लेखांकन की मुख्य तीन प्रारंभिक क्रियाएं है।
1. RECORDING(अभिलेखन) 2. CLASSIFICATION(वर्गीकरण) 3. SUMMARISING(संक्षेपण)
1. अभिलेखन(Recording)- किसी भी लेनदेन को पहली बार खाते में लिखे जाने की क्रिया को अभिलेखन कहते है। अभिलेखन को रोजनामचा/JOURNAL/DAILYBOOKभी कहते है।
2.वर्गीकरण(Classification)- अभिलेखन की क्रिया में लिखे गए लेन-देन को अलग-अलग खातो(Ledger) मे लिखे जाने को वर्गीकरण कहते है।
3.संक्षेपण(Summarising)- वर्गीकृत मदो को एकजगह लिखे जाने को संक्षेपण कहते है। इसेे तलपट/Trialbalance भी कहा जाता है।

लेखांकन की विशेषताएं(CHARACTERISTICS) –
1. व्यापारिक लेन-देन आंशिक रूप से या पूर्ण रूप से वित्तीय प्रकृति के होते है।
2. व्यापारिक सौदों को मुद्रा में व्यक्त किया जा सकता है।
3. लेखांकन मे लेनदेन को पहले रोजनामचा(Dialydairy) मे अभिलेखित किया जाता है और उसके बाद उसे खातो(Accounts) में वर्गीकृत किया जाता है।
4. यह लेखो का विश्लेेेषण(Analization) व निर्वचन(Execution) करने की प्रक्रिया है।
5. लेखो का विश्लेषण करने के बाद इन्हे उन व्यक्तियों को भेजा जाता है जो इस पर निष्कर्ष निकालते है व निर्णय लेते है।

लेखांकन के लाभ –
1. कोई भी व्यक्ति कितना भी बुद्धिमाान क्यो न हो वह व्यापार के संपूर्ण लेन-देन क्रय -विक्रय , मजदूरी-वेतन , बोनस आदि सब कुछ याद नहीं रख सकता इसलिए लेखांकन किया जाता है।
2. लेखांकन से हमे विभिन्न बातों का पता चलता है जैसे :
a.व्यापार के लाभ-हानि के बारे मे पता चल जाता है।
b.व्यापार में कितनी संपत्ति व दायित्व है इसके बारे मे पता चलता है।
c.व्यापार की आर्थिकस्थिति के बारे मे पता चलता है।
d.व्यापार के नगद व उधार के बारे पता चलता है।
4. वित्तीय खातों से हम कर्मचारियों के वेतन , बोनस , भत्ते आदि का निर्धारण आसानी से कर सकते है।
5. व्यापारिक झगड़े की स्थिति में खातो को न्यायालय में प्रमाण के रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है।
लेखांकन के कार्य :
1. आधारभूत कार्य – इस कार्य में रोजनामचा मे लेखा खातो में वर्गीकरण तथा तलपट बनाना शामिल है।
2. व्याख्यात्मक कार्य – इस कार्य के अंतर्गत जिन व्यक्तियों को लेखांकन से संबंधित सूचनाओ की जरूरत होती है उनके लिए वित्तीयविवरण(financial statements) तथा प्रतिवेदन(reports) की व्याख्या शामिल है।
3. वैधानिक कार्य – इस कार्य के अंतर्गत विभिन्नन कानूनों जैसे कंपनी अधिनियम , बिक्रीकर अधिनियम , आयकर अधिनियम आदि की आवश्यकताओ को पूर्ण किया जाता है। कंपनी अधिनियम के अंतर्गत वार्षिक खाते तैयार करना , बिक्रीकर अधिनियम केेेे अंतर्गत बिक्रीकर रिटर्न भेजना तथा आयकर अधिनियम के अंतर्गत आयकर रिटर्न भेजना आदि कार्य शामिल है।
4. संप्रेषण कार्य – व्यापार की वित्तीय स्थिति तथा अन्य संबंधित सूचनाओं को तृतीय पक्षकारों तथा प्रबंधको तक पहुँचाना जिन्हे उनकी आवश्यकता है।
5. निर्णय लेने में सहायक – लेखांकन जरूरी सूचनाएं उपलब्ध कराता है जिससे निर्णय लेने में सहायता मिलती है।
6. संपत्तियों का लेखांकन – प्रत्येक व्यवसाय मे विभिन्न संपत्तियो होती है। जिनका विवरण होना जरूरी होता है जिससे संपत्तियो की रक्षा की जा सके।
लेखांकन के उद्देश्य :
1. इसमे व्यवसाय के सभी लेन-देन का पूर्ण तथा व्यवस्थित ढंग से लेखा किया जाता है।
2. इसका उद्देश्य लाभ हानि ज्ञात करना है।
3. इसका उद्देश्य व्यापार की वित्तीय स्थिति का पता लगाना है।
4. व्यवसाय के विभिन्न पक्षों (कर्मचारियो , प्रबंधको , लेनदारो तथा निवेशको) को विभिन्न सूचनाऐ उपलब्ध कराना है जो व्यवसाय में हीत रखते है।