आया था कलयुग पहली बार जब , क्या हुआ था तब !

महाभारत के युद्ध के बाद हस्तिनापुर में राजा परीक्षित का राज्य था। राजा परीक्षित पांडवों के प्रपौत्र व अभिमन्यु और उत्तरा की संतान थे। राजा परीक्षित के समय में प्रथम बार कलयुग का आगमन होता है राजा परीक्षित जब कलयुग से उसका परिचय पूछते है तो वह कहता है “मै कलयुग हूँ यह युग परिवर्तन का समय है मेरे समय मे पाप (चोरी , डकैती , धोखा …) कार्यो की वृद्धि होगी।”

राजा परीक्षित प्रारंभ में कलयुग को अपनेेे राज्य में स्थान नहीं देते तब कलयुग कहता है “राजन मेरा आना तो निश्चित है अतः आप मुझे अपने राज्य में रहनेेे के लिए कुछ स्थान देने की कृपा करे।” तब राजा परीक्षित कलयुग केेे लिए चार स्थान निर्धारित करते हैं

1.जिस स्थान पर जुआ खेला जाता हो।

2.जिस स्थान पर मांस मदिरा का सेवन होता हो।

3.जिस स्थान पर पाप कार्य होते हो।

4.सोने मे।

कुछ समय पश्चात जब राजा परीक्षित शिकार पर जाते हैं शिकार खेलते-खेलते थक्कर वे शमीक ऋषि के आश्रम में पानी पीने के लिए जाते है। वहां पर शमीक ऋषि के तपस्या मै बैठे होने के कारण उन्हे राजा के आगमन का आभास नही होता और राजा को आसन व पानी के लिए कोई नही पूछता है। राजा परीक्षित जो बहुत परोपकारी राजा थे परंतु उस समय पर सोने का मुकुट धारण किए हुए थे और मुकुट सोने का होने के कारण कलयुग का उसमे वास हो जाता है जिस कारण राजा को यह अपना अपमान महसूस देता है। तब राजा परीक्षित एक मरा हुआ साँप शमीक ऋषि के गर्दन में डाल कर चले जाते है।

दूसरी तरफ शमीक ऋषि का युवा पुत्र श्रृंगी ऋषि अपने मित्रों के साथ तलाब में नहाने के लिए गया होता है। वहां पर उसके कुछ मित्र उसे अपमानित करते हुए कहते हैं कि कोई राजा तुम्हारे पिताजी का अपमान करके चला गया है तब श्रृंगी ऋषि अपने युवापन के आवेश मे होने के कारण श्राप देते है कि जिस व्यक्ति ने मेरे पिता का अपमान किया है उसकी आज से सातवें दिन तकक्षकनाग के काटने से मृत्यु हो जाएगी।

GYAANCLASS द्वारा प्रकाशित

ज्ञान पर सबका समान अधिकार है।

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