आचार्य चाणक्य ने बताई है यह बातें छात्रो , स्त्रियो और रिश्तेदारों के बारे मे !

आचार्य चाणक्य का नाम तो आप सबने सुना ही होगा। वह बचपन से ही प्रतिभावान , जिज्ञासु और अध्ययनशील थे। उन्होंने संपूर्ण वेदों और अर्थशास्त्र का अध्ययन किया। वे एक महान विद्वान थे। आचार्य चाणक्य ने चंद्रगुप्त मौर्य को अपना शिष्य बनाया उसे युद्ध और राजनीति की शिक्षा दी तथा समय-समय पर उसका मार्गदर्शन किया जिस कारण चंद्रगुप्त मौर्य एक महान राजा बन गया था। कोई भी व्यक्ति आचार्य चाणक्य के बताए गए रास्तों को अपनाकर अपने जीवन में सफल हो सकता है। आचार्य चाणक्य ने वेदों तथा राजनीति के ज्ञान को लोगों तक पहुंचाया जिसे हम चाणक्य नीति के नाम से भी जानते है। इस चाणक्य नीति का प्रयोग करके कोई भी व्यक्ति अपने जीवन के दुखों तथा समस्याओं से मुक्ति प्राप्त कर सकता है।

मूर्खशिष्योपदेशेन दुष्टास्त्रीभरणेन च ।
दुःखितै सम्प्रयोगेण पण्डिताेऽप्यवसीदति ।।

1. मूर्ख छात्रों और व्यक्ति को कभी भी ज्ञान की बाते नहीं बतानी चाहिए क्योंकि वह सदा उसका उल्टा अर्थ निकालते है। मूर्ख व्यक्तियों के पास अधिक बुद्धि नहीं होती। जब हम उन्हें कोई बात बताते है तो वह अपने मन मे उस बात का गलत अर्थ निकाल सकते है। गलत अर्थ निकालने के कारण वह व्यक्ति आपसे झगड़ा भी कर सकता है तथा अन्य किसी व्यक्ति के सामने उस बात को प्रकट करके आप को संकट में भी डाल सकता है।

2. हमे चरित्रहीन और बुरी स्त्री की संगति कभी नहीं करनी चाहिए। यदि कोई व्यक्ति आपको चरित्रहीन स्त्री के साथ देख लेता है तो इससे आपके यश की हानि हो सकती है। समाज में आपका सम्मान घट सकता है।

3. सदा दुख में रहने वाले दुखी परिजनों और बंधु के भी अधिक संपर्क में नहीं रहना चाहिए क्योंकि इससे बुद्धिमान व्यक्ति भी सदा दुख का सामना करता है। यदि हम दुखी व्यक्ति के संपर्क में अधिक रहते है तो इससे हमारे मन मे नकारात्मकता आ जाएगी जिस कारण हम अपने सही होते हुए कार्य को भी गलत कर सकते है।

GYAANCLASS द्वारा प्रकाशित

ज्ञान पर सबका समान अधिकार है।

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