
लेखांकन के प्रकार – लेखांकन के मुख्यतः तीन प्रकार होते है।
1. वित्तीय लेखांकन(Financial Accounting)
2. लागत लेखांकन(Cost Accounting)
3. प्रबंधकीय लेखांकन(Manegment Accounting)
1. वित्तीय लेखांकन(Financial Accounting) – जब हम कोई व्यापार करते हैं तो उसमें बहुत सारे लेनदेन होते है।क्रय विक्रय होता है , आय-व्यय होता है तथा संपत्ति आदि भी होती है। इन सब का लेखांकन जिन पुस्तकों में किया जाता है उसे ही वित्तीय लेखाांक कहते है। इसकी सहायता से हम लाभ-हानि तथा आर्थिक चिट्ठा तैयार करते है तथा व्यापार की आर्थिक स्थिति का पता लगाते है।
2. लागत लेखांकन(Cost Accounting) – जब हम उत्पादन करते है तो उसमे काफी लागत आती है जैसे कच्चामाल , लेबर आदि । जिनका लेखा लागत लेखांकन में किया जाता है। जिसकी सहायता से हम उस वस्तु की प्रति ईकाई लागत तथा कुल लागत का पता लगाते है। इसे ही लागत लेखांकन कहते है। जो उत्पादन करते है उनके लिए लागत लेखांकन के बिना वित्तीय लेखांकन करना भी संभव नहीं है।
3. प्रबंधकीय लेखांकन(Manegment Accounting) – प्रबंध के उद्देश्यों की पूर्ति के लिए जो लेखांकन किया जाता है उसे प्रबंधकीय लेखांकन कहते है। जिसके आधार पर प्रबंधक विभिन्न निर्णय लेने में सक्षम होते है तथा कंपनी की आर्थिक स्थिति का पता लगा सकते है।

लेखांकन के आधारभूत नियम(Basic Rules of Accounting) – लेखांकन के तीन मुख्य नियम होते है।
1. जो आया उसे डेबिट तथा जो गया उसे क्रेडिट करते है(What comes in debit and what goes out credit).
2. पाने वाले को डेबिट तथा देने वाले को क्रेडिट करते है(Debit the receiver and credit the giver).
3. सभी हानि और खर्चे डेबिट(debit) करते है तथा सभी लाभ और आय क्रेडिट(credit) करते है(All losses , expenses debit and all gains , incomes are credit).
उपरोक्त तीन नियमो को निम्नलिखित तीन लेखो की मदद से समझा जा सकता है
1. वास्तविक लेखे
2. व्यक्तिगत लेखे
3. अवास्तविक लेखे
1. वास्तविक लेखे(Real account) : किसी भी व्यापार में वस्तु या संपत्ति से संबंधित काफी लेन-देन होते है। वस्तु या संपत्ति से संबंधित लेन-देन के लेखो को ही वास्तविक लेखा कहा जाता है। किसी वस्तु का क्रय या विक्रय अथवा किसी संपत्ति का क्रय या विक्रय वास्तविक लेखा होता है।
उदाहरण :
व्यापार से संबंधित कोई वस्तु खरीदी तो उसे क्रय अकाउंट(purchase account) में डेबिट(debit) करेंगे और यदि वस्तु बेची तो उसे विक्रय अकाउंट(sales account) में क्रेडिट(credit) करेंगे।
फर्नीचर बेचा तो उसे क्रेडिट(credit) करेंगे अथवा यदि फर्नीचर खरीदा तो उसे डेबिट(debit) करेंगे। यहां क्रय(purchase) , विक्रय(sales) तथा फर्नीचर आदि वास्तविक खाते है।
“जो आया उसे डेबिट तथा जो गया उसे क्रेडिट करते है(What comes in debit and what goes out credit)”

2. व्यक्तिगत लेखे(Personal account) : किसी व्यापार में व्यक्ति या संस्था से किए जाने वाले संबंधित लेन-देन को व्यक्तिगत लेखा कहते है।
उदाहरण :
यदि किसी व्यक्ति से नकद रोकड़ प्राप्त की अथवा नकद रोकड़ दी या किसी व्यक्ति को उधार माल बेचा अथवा किसी व्यक्ति से उधार माल खरीदा।
यहां पर जब व्यक्ति को उधार माल बेचा अथवा रोकड दी तो उस व्यक्ति को डेबिट(debit) करेंगे। जब व्यक्ति से उधार माल खरीदा अथवा रोकड़ प्राप्त की तो उस व्यक्ति को क्रेडिट(credit) करेंगे। इन्ही लेखो को व्यक्तिगत लेखा कहते है।
“पाने वाले को डेबिट तथा देने वाले को क्रेडिट करते है(Debit the receiver and credit the giver).”
3. अवास्तविक लेखे(Nomial account) : किसी व्यापार में आय-व्यय संबंधित काफी लेन-देन होते है। आय-व्यय से संबंधित इन लेखो को ही अवास्तविक लेखे कहा जाता है। उदाहरण :
मजदूरी , ब्याज , किराए का भुगतान किया तो उसे डेबिट(debit) करेंगे अथवा ब्याज , किराया प्राप्त किया तो उसे क्रेडिट(credit) करेंगे। इन्ही लेखो को वास्तविक लेखा कहा जाता है।
“सभी हानि और खर्चे डेबिट(debit) करते है तथा सभी लाभ और आय क्रेडिट(credit) करते है(All losses , expenses debit and all gains , incomes are credit).”
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